Monday, January 14, 2013

सियानी गोठ

सियानी गोठ



जनकवि स्व.कोदूराम “दलित

29 - कुकुर

रखवारी  घर के करय , जउन मिलय सो खाय
लुडुर - लुडुर मालिक करा ,  पूँछी कुकुर हलाय
पूँछी कुकुर हलाय, चिन्हय घर के सब झन-ला
भूँक - भूँक  के  भगा  देय  वो  चोर  मनन –ला
कुकुर  आय   पर   करय   नहीं  कभ्भू  गद्दारी
बइठ    मुहाटी - मां  करथय   घर  के  रखवारी. 

[ कुत्ता – घर की रखवाली करता है, जो मिल जाता है खा लेता है. कुत्ता अपने मालिक के पास लुडुर-लुडुर ( आंचलिक शब्द )पूँछ हिलाता है.घर के सब लोगों को पहचानता है और चोरों को भौंक-भौंक कर भगा देता है. कुत्ता है किंतु कभी गद्दारी नहीं करता.घर के प्रवेश द्वार पर बैठ कर घर की रखवाली करता है.]

4 comments:

  1. सुन्दर रचना बाबूजी के, प्रेरणा हमला लेना चाही।

    छत्तीसगढ़ी साहित्य के घलो डंका बजना चाही।

    बहुत सुन्दर .....बधाई।

    ReplyDelete
  2. बहुत सुन्दर ।

    आभार ।।

    कुक्कुर-खांसी पाल के, बैठे रविकर द्वार ।

    घर की रखवाली करे, पुत्र बसा ससुरार ।

    पुत्र बसा ससुरार, श्वान सी निद्रा अच्छी ।

    एकमात्र दे कष्ट, घूमती कुक्कुर-मच्छी ।

    हाथ लकुटिया थाम, कलेजा धुक्कुर धुक्कुर ।

    राम राम सतनाम, अवस्था रविकर कुक्कुर ।।

    ReplyDelete
  3. आपकी उत्कृष्ट प्रस्तुति का लिंक लिंक-लिक्खाड़ पर है ।।

    ReplyDelete