Tuesday, January 15, 2013

सियानी गोठ

सियानी गोठ  
 


जनकवि स्व.कोदूराम “दलित

30 - सिंह

करता वन में  सिंह तू  निरभय  रह कर  राज
सुन   दहाड़  तेरी  डरें  ,  गेण्डे   गजराज
गेण्डे   गजराज   ,  सभी   पशु   थर्राते  हैं
बचते    नहीं   पकड़   में   जो   तेरी   आते   हैं
नहीं तनिक भी मन में कभी किसी से डरता
वन  में  तू   वनराज  बेधड़क  विचरा  करता.

4 comments:

  1. स्वयमेव मृगेन्द्रता..

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  2. बहुत सुन्दर प्रस्तुति

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  3. बेहतरीन प्रस्तुति,आभार है आपका.

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  4. उम्दा प्रस्तुति
    वाह

    आपके विचार की प्रतीक्षा में
    jyoti-khare.blogspot.in
    कहाँ खड़ा है आज का मजदूर------?

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