सियानी गोठ
जनकवि स्व.कोदूराम “दलित”
जनकवि स्व.कोदूराम “दलित”
28 - कायर
सुनय बिगुल – ला युद्ध के, खटिया तरी लुकाय
गुर्रावय जे घरे – मां , कायर उही कहाय
कायर उही कहाय , कोल्हिया कहूँ कुदावय
हँफरत - हँफरत लगे – हाँत घर भागत आवय
यही किसम डर डर के करय कलंकित कुल-ला
खटिया तरी लुकाय जुद्ध के सुनय बिगुल-ला.
[ युद्ध का बिगुल सुन
कर खाट के नीचे छुप जाता है, जो घर में ही गुर्राता है, वही कायर कहलाता है. उसे
यदि सियार भी दौड़ाए तो हाँफते –हाँफते भागता हुआ घर आ जाता है. इस तरह वह डर – डर
कर कुल को कलंकित करता है ]
संदेश :- वीर बनो , देश की रक्षा करो. कायर
बन कर जीने से कुल कलंकित होता है.