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Thursday, March 22, 2012

विश्व जल दिवस पर....




गोल गोल रानी   ,  इत्ता इत्ता पानी
कविता ये सुहानी , बचपन की निशानी
गा गा के सुनाती थी सबकी दादी नानी
गोल गोल रानी   ,  इत्ता इत्ता पानी

मोती मानस चून के   वास्ते हो पानी
किसने सुनी नहीं  रहिमन की जुबानी
सोचें , क्या ये सिर्फ है कविता पुरानी
गोल गोल रानी  ,  इत्ता इत्ता पानी.

थोड़ी सी नादानी   ,  लायेगी वीरानी
आयेगी कहाँ से फिर मौजों की रवानी
कहीं मिट जाये नहीं,जीवन की निशानी
गोल गोल रानी  ,  इत्ता इता पानी.

विश्व जल दिवस पर मन में है ठानी
जल संरक्षण करेंगे, पीयेंगे शुद्ध पानी
कारण  तलाशें कैसे  गोल हुआ पानी
गोल गोल रानी  ,  इत्ता इता पानी.

श्रीमती सपना निगम
आदित्य नगर, दुर्ग (छत्तीसगढ़)