Thursday, September 27, 2012

सियानी गोठ


 सियानी गोठ
 
जनकवि स्व.कोदूराम “दलित

26 - राख

नष्ट करो झन राख –ला, राख काम के आय
परय खेत-मां राख हर , गजब अन्न उपजाय
गजब  अन्न  उपजाय ,  राख मां  फूँको-झारो
राखे-मां  कपड़ा – बरतन  उज्जर  कर  डारो
राख  चुपरथे  तन –मां, साधु,संत, जोगी मन
राख  दवाई  आय  , राख –ला नष्ट करो झन.


[ राख – राख को नष्ट ना करें ,यह बहुत ही उपयोगी  है. राख जब खेत में डाली जाती है तो अन्न का उत्पादन बढ़ाती है.राख से ही झाड़-फूँक की जाती है. राख से ही कपड़ेऔर बर्तन उजले होते हैं. साधु,संत और योगी अपने तन पर राख चुपड़ते(लगाते/मलते) हैं.राख दवा भी है, राख को नष्ट ना करें.]

Wednesday, September 26, 2012

सियानी गोठ


 सियानी गोठ
 
जनकवि स्व.कोदूराम “दलित

25 - पेपर

पेपर  मन –मां  जगत के ,  समाचार  छपवाव
पत्रकार  मन  सबो  ला , मारग सुघर दिखाव
मारग सुघर दिखाव, अउर जन-प्रिय हो जाओ
स्वारथ - बस पेपर-ला  ,झन पिस्तौल बनाओ
पेपर  मन  से जागृति आ जावय जन-जन मां
सुग्घर   समाचार   छपना   चाही   पेपर  -  मां.

[पेपर  - समाचार-पत्रों में जगत भर के समाचार प्रकाशित करें. पत्रकार जन सभी को अच्छी राह दिखायें और जनप्रिय हो जायें. स्वार्थ के लिये समाचार-पत्र को पिस्तौल मत बनायें. समाचार-पत्रों से जन-जागृति आ जाये. समाचार पत्र में अच्छे , सकारात्मक समाचार प्रकाशित होने चाहिये.]