Wednesday, September 26, 2012

सियानी गोठ


 सियानी गोठ
 
जनकवि स्व.कोदूराम “दलित

25 - पेपर

पेपर  मन –मां  जगत के ,  समाचार  छपवाव
पत्रकार  मन  सबो  ला , मारग सुघर दिखाव
मारग सुघर दिखाव, अउर जन-प्रिय हो जाओ
स्वारथ - बस पेपर-ला  ,झन पिस्तौल बनाओ
पेपर  मन  से जागृति आ जावय जन-जन मां
सुग्घर   समाचार   छपना   चाही   पेपर  -  मां.

[पेपर  - समाचार-पत्रों में जगत भर के समाचार प्रकाशित करें. पत्रकार जन सभी को अच्छी राह दिखायें और जनप्रिय हो जायें. स्वार्थ के लिये समाचार-पत्र को पिस्तौल मत बनायें. समाचार-पत्रों से जन-जागृति आ जाये. समाचार पत्र में अच्छे , सकारात्मक समाचार प्रकाशित होने चाहिये.]

Monday, September 24, 2012

सियानी गोठ


 सियानी गोठ
 
जनकवि स्व.कोदूराम “दलित”

24 – पंचशील

बंधन –मां जतका हवयँ, सबला मुक्त कराव
पंचशील ला मान के ,  विश्व-शांति अब लाव
विश्व-शांति अब लाव , सबो के भला विचारो
अस्त्र-शस्त्र,बम वम  सब ला सागर मां डारो
आ जावय बंधुत्व-भाव, जन-जन के मन मां
रहे   पावे  अब  कोन्हों , मनखे  बंधन मां.


[ पंचशील – जितने भी बंधन में(बंधक) हैं, उन सबको मुक्त करायें. पंचशील को मानें और विश्व में शांति लायें. सबके कल्याण के लिये विचार करें. अस्त्र-शस्त्र,बम इत्यादि को सागर में डाल दें. जन-जन के मन में बंधुत्व-भाव आ जाये. अब कोई भी मनुष्य किसी के बंधन में नहीं रह पाये ]

Friday, September 21, 2012

सियानी गोठ


 सियानी गोठ
 
जनकवि स्व. कोदूराम “दलित”

23. अणु

अणु ला नान्हें समझ मत, अणु ला तुच्छ न जान
अणु मा शक्ति  अघात हे  ,   अणु मन आयँ महान
अणु मन आयँ महान,बनिस अणु-अणु मां भुइयाँ
अणु मन आयँ  विनाशक  अउ निरमाण करइया
अणु  के  असल  मरम - ला  अणु  रखइया  जाने
करो सृजन अणु मां , समझो मत अणु ला नान्हें.

[ अणु को छोटा मत समझें, इसे तुच्छ भी नहीं जानें. अणु में अपार शक्ति होती है. अणु महान होता है. अणुओं के मेल से ही यह धरती बनी है. अणु विनाशक है तो निर्माणकर्ता भी है. अणु का असली मर्म तो अणु के रक्षक ही जानते हैं. अणु का प्रयोग सृजन के लिये करें.]