सियानी गोठ

जनकवि कोदूराम “दलित”
15.फूट
होही सब झन के भला
, रहो सबो झिन एक
झगड़ा – झाँसा छोड़ के , बनो सबो झिन नेक
बनो सबो झिन नेक , देस ला अपन बनाओ
आजादी के गंगा ला, घर - घर पहुँचाओ
फूट- पिशाचिन भला नइ करय कोन्हों मन के
मिल-जुल के सब रहो, भला होही सब झन के.
बहुत खूब ... सही सीख ...
ReplyDeleteसुंदर सीख .... आज कल इसका उल्टा ही देखने को मिलता है
ReplyDeleteबढ़िया ||
ReplyDeleteबधाई ||
संघे शक्ति कलियुगे..
ReplyDeleteबहुत सुन्दर प्रस्तुति!
ReplyDeleteलिंक आपका है यहीं, मगर आपको खोजना पड़ेगा!
इस प्रविष्टी की चर्चा कल रविवार के चर्चा मंच पर भी होगी!
सूचनार्थ!