Saturday, April 28, 2012

50 वीं पोस्ट : सियानी गोठ



 50 वीं पोस्ट :
 सियानी गोठ
 

जनकवि कोदूराम “दलित”

10.    गोबर

गरुवा   के  गोबर  बिनो ,  घुरवा  में   ले  जाव
खूब  सड़ो  के  खेत बर  , सुग्घर खाद बनाव
सुग्घर   खाद   बनाव  ,  अउर   डोली  में  डारो
दुगुना-तिगुना सबो जिनिस मन ला उपजारो
खइता  करो  न  येला , छेना   बना - बना  के
सोन समझ के सइतो   नित गोबर गरुवा के.


[ गोबर – गाय के गोबर को बीन कर घुरवा (गाँव में कचरा जमा करने का नियत स्थान) में ले जायें . इसे अच्छी तरह सड़ा कर खेत के लिये बढ़िया खाद बनावें और डोली में (मेड़ों से घिरा अपेक्षाकृत गहरा, धान का खेत) डालें. सब प्रकार की फसलों का उत्पादन दुगुना-तिगुना कर लें. कंडे बना बना कर इसे (गोबर को) नष्ट न करें. प्रति दिन गाय के गोबर को  स्वर्ण समझ कर  समेटें]

5 comments:

  1. वाह! बहुत अच्छी जानकारी मिली.
    ५० वीं पोस्ट के लिए बहुत बहुत बधाई.

    समय मिलने पर मेरे ब्लॉग पर आईयेगा.
    आपकी टिपण्णी मन को हर्षाती है.

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  2. गाय के गोबर के कितने काम।

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  3. बहुत सुन्दर वाह!
    आपकी यह ख़ूबसूरत प्रविष्टि कल दिनांक 30-04-2012 को सोमवारीय चर्चामंच-865 पर लिंक की जा रही है। सादर सूचनार्थ

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  4. बहुत सुंदर रचना ...

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